धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार न करने की अपील: लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र

यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि गाजियाबाद, 25 जुलाई। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद की लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार नहीं करने का अनुरोध किया है। विधायक ने अपने पत्र में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक आधार…

यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि


गाजियाबाद, 25 जुलाई। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद की लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार नहीं करने का अनुरोध किया है। विधायक ने अपने पत्र में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक आधार पर इस्तीफा देकर राजनीतिक शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है, लेकिन देशहित, शिक्षा सुधारों की निरंतरता और करोड़ों छात्रों के भविष्य को देखते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इस संबंध में उनका पत्र सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

पत्र में नंद किशोर गुर्जर ने लिखा कि हाल के घटनाक्रम और विभिन्न आंदोलनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक जवाबदेही का उदाहरण बताया। हालांकि विधायक का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और देशवासी भावनात्मक रूप से आहत हैं और चाहते हैं कि शिक्षा सुधारों की गति बनी रहे।

उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा कि देश के युवाओं और छात्रों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व पर गहरा विश्वास है। यह भरोसा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

पत्र में धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि उन्होंने छात्र जीवन से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक की यात्रा के दौरान शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। मेडिकल शिक्षा, इंजीनियरिंग शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार के साथ-साथ गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

विधायक ने यह भी लिखा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों के बावजूद रिकॉर्ड समय में परीक्षाओं का सफल आयोजन कराया गया और उनके परिणाम भी घोषित किए गए। उनके अनुसार, इसके बाद देशभर से विद्यार्थियों और अभिभावकों द्वारा संतोष व्यक्त करने वाले अनेक संदेश सामने आए, जो व्यवस्था में सुधार के प्रयासों को दर्शाते हैं।

अपने पत्र में नंद किशोर गुर्जर ने कुछ आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि शुरुआती दौर में कुछ तत्वों ने छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास किया और बाद में आंदोलन को कथित रूप से बाहरी समर्थन भी मिला। उन्होंने इन आरोपों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों या साजिश की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

विधायक ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार करने से देश के करोड़ों छात्रों, युवाओं और राष्ट्रहित में सोचने वाले लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उनका मानना है कि इससे शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की निरंतरता पर भी असर पड़ सकता है।

पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री से विनम्र अनुरोध किया कि राष्ट्रहित, शिक्षा सुधारों की निरंतरता और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री इस विषय पर उचित निर्णय लेकर शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाएंगे।

गौरतलब है कि हालिया घटनाक्रम के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर विभिन्न दलों और नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर का यह पत्र भी राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

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