नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई वाहन मालिक यह जानना चाहते हैं कि क्या भविष्य में बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल (Pure Petrol) भी उपलब्ध रहेगा या नहीं। इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद में इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने यह भी साफ किया कि पुराने E10 पेट्रोल को दोबारा शुरू करने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि फिलहाल देश में एथेनॉल मिश्रण की नीति निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार लागू की जा रही है और इससे आगे बढ़ाने पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है।
क्या होता है E10 और E20 पेट्रोल?
पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की मात्रा के आधार पर ईंधन को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है।
- E10 का अर्थ है पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल और 90 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल।
- E20 में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
सरकार का उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
क्या मिलेगा बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल?
संसद में सरकार की ओर से दिए गए जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि देशभर में बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल अलग से उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने केवल इतना कहा कि 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल आम उपभोक्ताओं को अलग से बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने की कोई नई योजना घोषित नहीं की गई है।
E10 की वापसी पर क्या कहा?
कुछ समय से ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि पुराने E10 पेट्रोल को दोबारा बड़े स्तर पर उपलब्ध कराया जा सकता है। हालांकि सरकार ने इस संबंध में भी कोई पुष्टि नहीं की है। संसद में दिए गए जवाब के अनुसार E10 को लेकर फिलहाल कोई नया निर्णय नहीं लिया गया है। इसका मतलब है कि अभी मौजूदा नीति के अनुसार ही ईंधन की आपूर्ति जारी रहेगी।
सरकार एथेनॉल मिश्रण क्यों बढ़ा रही है?
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कई लाभ होते हैं।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है।
- विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
- किसानों को गन्ना और अन्य फसलों से अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं।
- प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है।
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।
इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है।
वाहन मालिकों की चिंता
हालांकि कई वाहन मालिकों का कहना है कि पुराने मॉडल के कुछ वाहनों में अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लेकर तकनीकी चिंताएं बनी हुई हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि नए वाहनों को E20 ईंधन के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, लेकिन पुराने वाहनों के लिए निर्माता कंपनियों की सलाह का पालन करना जरूरी है। इसी कारण कई लोग बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अभी क्या है स्थिति?
सरकार के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल E20 से आगे बढ़ने का कोई प्रस्ताव लागू नहीं किया गया है। साथ ही बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल या E10 की व्यापक वापसी को लेकर भी कोई नई घोषणा नहीं हुई है। यानी फिलहाल देश में वही ईंधन नीति लागू रहेगी, जो पहले से निर्धारित है।
आगे क्या हो सकता है?
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव से पहले सरकार वाहन उद्योग, तेल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा कर सकती है। यदि कोई नई नीति लागू की जाती है, तो उसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से जारी की जाएगी।
यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि













