अयोध्या में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के हालिया दौरे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उनके दौरे के बाद अब संत समाज के एक वर्ग ने कई मुद्दों को उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। संत आशुतोष ब्रह्मचारी ने राम जन्मभूमि थाने में तहरीर देकर शंकराचार्य के खिलाफ मामला दर्ज करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में सरकारी प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन, हनुमानगढ़ी को लेकर दिए गए कथित बयान, रामलला की प्रतिमा से जुड़ी टिप्पणी, गोमाता अभियान तथा नाबालिग बटुकों की भागीदारी सहित कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
थाने में दी गई तहरीर
राम जन्मभूमि थाने में दी गई शिकायत में संत आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि शंकराचार्य के अयोध्या प्रवास के दौरान कई ऐसी गतिविधियां हुईं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी भी कार्यक्रम के दौरान निर्धारित नियमों या प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सरकारी प्रोटोकॉल को लेकर सवाल
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि शंकराचार्य के दौरे के दौरान सरकारी प्रोटोकॉल से जुड़े कुछ नियमों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कार्यक्रमों के आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था में सभी निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हनुमानगढ़ी और रामलला पर कथित टिप्पणी का जिक्र
शिकायत में हनुमानगढ़ी को लेकर शंकराचार्य द्वारा दिए गए कथित बयान और रामलला की प्रतिमा से संबंधित कथित टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन बयानों की सत्यता और उनके प्रभाव की भी जांच की जानी चाहिए। फिलहाल इन आरोपों पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद या उनके प्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
गोमाता अभियान को लेकर भी उठे सवाल
तहरीर में गोमाता अभियान से जुड़े कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अभियान के संचालन के दौरान कुछ प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते हैं, जिनकी जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सभी तथ्यों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सके।
नाबालिग बटुकों की भागीदारी पर आपत्ति
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कार्यक्रमों में कथित रूप से नाबालिग बटुकों को शामिल किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय है कि उनकी भागीदारी किन परिस्थितियों में हुई और क्या सभी आवश्यक नियमों का पालन किया गया। इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की गई है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
राम जन्मभूमि थाना पुलिस को दी गई तहरीर के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रारंभिक जांच में क्या तथ्य सामने लाती है। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार पुलिस शिकायत का परीक्षण करती है और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लेती है। यदि जांच के दौरान पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
सभी पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण
इस मामले में अब तक शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, इन आरोपों पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी भी विवादित मामले में निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों का पक्ष सामने आना न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है।













