दिल्ली में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इस बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संसद परिसर में धरना शुरू कर दिया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ अन्याय हुआ है और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
संसद परिसर में धरने पर बैठे चंद्रशेखर ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं के साथ कठोर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए।
संसद परिसर में शुरू हुआ धरना
सांसद चंद्रशेखर रात से ही संसद परिसर में धरने पर बैठे हैं। उनके साथ पार्टी के कई कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे। धरने के दौरान उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार और संसद तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कोई विवाद या हिंसा होती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
CJP मार्च को लेकर क्या कहा?
चंद्रशेखर ने CJP के संसद मार्च का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रदर्शनकारियों के साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती की गई। उनके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करना संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
“बच्चों पर अत्याचार हुआ”
धरने के दौरान चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान बच्चों और युवाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के आरोप सामने आए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से पहले कहा गया है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी। पुलिस का कहना है कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं होती हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक हो जाता है।
न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि उनका धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और न्याय सुनिश्चित नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहें।
दिल्ली पुलिस की जांच जारी
इस बीच दिल्ली पुलिस संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच कर रही है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कानून के अनुसार ही होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
CJP मार्च और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के पक्ष में बयान दिए हैं और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
लोकतंत्र और विरोध का अधिकार
भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। वहीं कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ न हो। ऐसे मामलों में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों—दोनों की जिम्मेदारी होती है कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया जाए।













